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केंद्र से पहले राज्य सरकार लागू करे यूनिफार्म सिविल कोर्ड कानून ::होसवले

 INT NEWS NETWORK 

--- संघ शताब्दी वर्ष पर संवाद में पहुंचे सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसवले

आईएनटी, न्यूज़ नेटवर्क,मुजफ्फरपुर: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सर कार्यवाह दत्तात्रेय होसवले ने कहा कि केंद्र सरकार के पहले राज्य सरकारों को यूनिफार्म सिविल कोर्ड कानून बनाना और लागू करना होगा। उत्तराखंड ने इस दिशा में पहल की है। अन्य राज्यों को भी स्थानीय परंपरा और संस्कृति को देखते हुए यूनिफॉर्म सिविल कोड बनाना चाहिए। वे रविवार को मुजफ्फरपुर के आरडीएस कॉलेज के सभागार में संघ शताब्दी वर्ष के अवसर पर आयोजित संगोष्ठी सह संवाद को संबोधित कर रहे थे। यंग प्रोफेशनलो के साथ हुए संवाद में उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार यूनिफॉर्म सिविल कोड बनाएगी तो कई तरहः की समस्या उत्पन्न होगी। देश के हिन्दू समाज ने बिना कानून बने ही जनसंख्या नियंत्रण कानून अपना लिया है, लेकिन दूसरे लोग इसके विरोध में है। केंद्र कानून बनाएगा तो विरोधी आंदोलन करने के साथ अराजक स्थिति पैदा करने की कोशिश करेंगे। मानवाधिकार आयोग अलग से परेशानी खड़ा करेगा। उन्होंने कहा कि यूनिफॉर्म सिविल कोड कानून बनाने की दिशा में प्रयत्न हो रहे हैं। लेकिन इसे लेकर पहले सही नीति बनाने की आवश्यकता है। देश के अंदर अलग अलग क्षेत्र में कई भिन्न परंपरा है। इसलिए यूनिफार्म सिविल कोर्ड को सीधे लागू करने में समस्या आ सकती है।

एक उपाय दिख रहा है कि राज्य अपने स्तर से अपनी नीति बनाकर राज्य में इसे लागू कर सकती है। उत्तराखंड और गुजरात में इस दिशा में प्रयास हो रहे हैं। अपने उदबोधन के बाद संवाद के दौरान यंग प्रोफेसनल के पूछे गए सवाल के जवाब में सर कार्यवाह श्री होसवले ने कहा कि जनसंख्या नियंत्रण को लेकर भी ऐसे ही कुछ चुनौतियां हैं। जनसंख्या असंतुलन सही नहीं है। इस पर सोचने की जरूरत है। संघ का इसमें राष्ट्र के विकास व हित के नाते अपना विचार है। इसमें क़ोई राजनीति नहीं है। धर्मान्तरण हो रहे, घुसपैठियों की समस्या है। इसमें किसी के मजहब की बात नहीं। जो राष्ट्र हित में उसे बोलना पड़ेगा। जाति और वोट बैंक की राजनीति भी सही नहीं है। ऐसे में भारत को बचाना है तो हिंदू समाज को एकजुट होना होगा। इससे पहले अपने उदबोधन में उन्होंने कहा कि समाज को सुधारने के प्रयास करने होंगे। सकारात्मक तरीके से सोचना होगा। साथ चलने की बातें प्राचीन काल से है। वेदकाल से इसीलिए कुटुंब की बातें हैं। सारा विश्व एक परिवार है। अकेले में भय भी है जबकि साथ चलने में प्रतिभा का विकास होता है। अहंकार नहीं आता और एक दूसरे से प्रेरणा भी मिलती है। केवल राजनीति से नहीं समाज को भी अपने स्तर से बदलाव लाने का प्रयास करना होगा। धर्म, अध्यात्म, शील, नैतिकता की दृष्टि से राष्ट्र धर्म को निभाएगे तो देश और सशक्त बनेगा। संवाद कार्यक्रम में विभिन्न जिलों से आए यंग प्रोफेशनल ने यूनिफार्म सिविल कोर्ड, जनसंख्या नियंत्रण के साथ क़ृषि कार्य के लिए कम होती जमीन, जैविक खाद, पौधरोपण, वागवानी, गो पालन, साहित्य, शिक्षा नीति, परिवार एवं शिक्षण संस्थान में संस्कार निर्माण, एआई के बढ़ते उपयोग दुरूपयोग, ऑनलाइन डिलीवरी से छोटे व्यापार पर प्रभाव सहित कई सवाल किए, जिसका जवाव देकर सर कार्यवाह ने उनकी जिज्ञासा को शांत किया। इससे पूर्व शिक्षा क्षेत्र के लोगों के साथ आयोजित संगोष्ठी में सर कार्यवाह ने कहा कि टीम वर्क से बेहतर सफलता मिलती है। समाज के सभी वर्ग के लोगों को टीम भावना से काम करना चाहिए। परस्पर सहयोग से भी सभी को लाभ होता है। इसलिए सभी लोगों में एक दूसरे के प्रति परस्पर सहयोग का स्वभाव होना चाहिए। उन्होंने शिक्षा क्षेत्र के लोगों से छोटे छोटे प्रयास या काम से देश दुनिया को दिशा देने का प्रयास करना चाहिए। उदाहरण देते हुए कहा कि आजादी के करीब 80 साल बाद भी पंचायत विकास के उस मुकाम तक नहीं पहुंच सका, जहां पहुंचना चाहिए।

यह स्थिति दर्शाती है कि यदि टीम भावना से काम होता तो समाज और बलवान होता। अपने सम्बोधन की शुरुआत में सर कार्यवाह श्री होसवाले जी ने दरभंगा महाराज की अंतिम महारानी कामसुंदरी देवी के निधन पर शोक संवेदना जताते हुए देश, समाज और शिक्षा के क्षेत्र में योगदान की चर्चा की। कहा कि उन्होंने देश जब संकट था तब महारानी ने 600 किलो सोना दान किया था। आज दरभंगा का विवि, एयरपोर्ट उनकी ही दान की हुईं जमीन पर है। ऐसे कई उदाहरण है। कहा कि ऐसे में समाज में अच्छा काम करने वाले लोगों को समय समय पर मिलते जुलते रहना चाहिए। ताकि सकारात्मक कार्यों में वृद्धि हो सके। उन्होंने कहा कि संघ के शताब्दी वर्ष पर जो कार्य किए जा रहे हैं। उसका उद्देश्य संघ की सदस्यता बढ़ाना उदेश्य नहीं है, बल्कि प्राचीन भारत से विरासत में हमें जो संस्कार, संस्कृति मिले हैं उसे आगे बढ़ाने के साथ कमियों को दूर करते हुए समाज को और सशक्त समृद्ध बनाना है। इसे वर्तमान भारत के कोने कोने और जन जन तक पहुंचाना है। प्राचीन काल से ही बिहार में शिक्षा का विशेष महत्व और लंबी परंपरा रही है। इसलिए शिक्षा क्षेत्र में कार्य करने वाले लोगों की जिम्मेदार और बढ़ जाती है। इस अवसर पर संघ के क्षेत्र कार्यवाह मोहन सिंह जी ने विषय प्रवेश कराया। मौके पर क्षेत्र प्रचारक रामनवमी जी, प्रान्त संघचालक गौरी शंकर प्रसाद, प्रान्त प्रचारक रविशंकर जी आदि मौजूद थे। संचालन विभाग संघचालक चंद्रमोहन खन्ना जी एवं धन्यवाद ज्ञापन प्रान्त सम्पर्क प्रमुख मोहिनीश जी ने किया।

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