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Muzaffarpur:समाज तभी सशक्त होगा जब बच्चे हमारे शिक्षित होंगे ::: साई लक्ष्मीnews

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---- एसबीआई ने पुलिस पाठशाला के बच्चों को दी ड्रेस व स्मार्ट क्लास 

आई एन टी, न्यूज नेटवर्क, मुजफ्फरपुर:: गुमनामी की जिंदगी जीने वाले परिवार के बच्चों को समाज की मुख्यधारा में जोड़ने के लिए‌ शिक्षा अधिकार दिलाने हेतु कन्हौली पुलिस नाका यानी टीओपी परिसर में चल रहे पुलिस पाठशाला अब हाई‌टेक हो गया।  स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया कि मदद से यहां पर आनलाइन क्लास यानी स्मार्ट क्लास कि व्यवस्था हो गई है। इतना ही नहीं एसबीआई ने अपने सामाजिक दायित्व का निर्वाहन करते हुए बच्चों को ड्रेस, स्कूल बैग उपलब्ध कराया । पहली बार ड्रेस मिलने के बाद बच्चों के चेहरे पर अदभुत खुशियां दिखी। उनकी खुशियां यह कह रही थी कि ---हम होंगे  कामयाब एक दिन, पूरा है विश्वास, मन में है विश्वास---।  स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया की महिला शाखा पटना कि अध्यक्ष अध्यक्ष साई लक्ष्मी बंगारराजु ने स्मार्ट क्लास बच्चों को प्रेजेंट किया।
 अध्यक्ष  बंगारराजु ने कहा कि शिक्षा से जीवन में बदलाव आता है। महिलाएं व बच्चों का बदलाव से ही समाज तथा राष्ट्र की प्रगति की दिशा में बड़ा कदम होता है। यहां आकर यह देखने को मिल रहा है छोटे-छोटे बच्चे किस तरह से ड्रेस, स्मार्ट क्लास कि नजदीक होकर अपने को बहुत ही खुश है। बच्चों का सर्वांगीण विकास हो उसके लिए एक छोटा सा उपहार है। लेकिन यह माहौल बना रहे इसके लिए हमारी महिला क्लब और एसबीआई  आपको सदेव सहयोग करता रहेगा। उन्होंने दोहराया कि समाज कभी सशक्त होगा जब बच्चों का को हम शिक्षित करेंगे। यह संकल्प लेकर यहां से जाना है।‌ बोली कि ---तेरी हिम्मत तेरी लड़ाई से जानी जाएगी।‌ तेरी किस्मत तेरी पढ़ाई से जानी जाएगी।

पुलिस पाठशाला के संचालन में सहयोग करने वाले सभी पुलिस पदाधिकारी समाजसेवी और खास करके एसबीआई अधिकारियों के प्रति भी उन्होंने आभार जताया। 
कार्यक्रम में अध्यक्ष के साथ क्लब कि सदस्य  विद्या नटराजन,चारू रहेजा, मीनाक्षी झा,एसबीआई के डीजीएम प्रफुल्ल कुमार झा, क्षेत्रीय प्रबंधक संजीत कुमार मुख्य रूप से शामिल रहे। धन्यवाद ज्ञापन मीनाक्षी झा ने की।

गोपालगंज एसपी बोले कि सभी सेवा करने के लिए जुड़े स्मार्ट क्लास शुभारंभ के साथ  स्क्रीन पर आन लाइन गोपालगंज के सिटी एसपी अवधेश दीक्षित आए ।बच्चों के चेहरे की हंसी देखते बन रही थी। बच्चे एक साथ बोले जय हिंद ‌सर । जवाब मिला जय हिंद सर ---। बच्चे जोरदार तालियां से स्वागत किया और उनके चेहरे पर जो खुशी थी यह देखकर  एसबीआई महिला शाखा के अधिकारी भी भावुक हुई। एसपी अवधेश सरोज दीक्षित ने एसबीआई बैंक के अधिकारियों, महिला संगठन के प्रति आभार जताते हुए कहा कि यह सहयोग आने वाले दिनों में याद किया जाएगा।

आईपीएस दीक्षित ने कहा कि यह वैसे बच्चे हैं जो शिक्षा से दूर हैं। कभी स्कूल का मूंह नहीं देखा। इनके अंदर बहुत ही हाई स्कील पावर है। जरूरत  इन्हें शिक्षा कि ताकत से लैश करना।  पुलिस पाठशाला के आनलाइन संवाद में शामिल एसबीआई के डीजीएम प्रफुल्ल कुमार झा ने एसपी साहब से सवाल किया कि मुजफ्फरपुर की तरह हम गोपालगंज में भी कुछ करना चाहते हैं।  जवाब मिला कि पहले हमें नसीमा और राजू को तलाश करने दीजिए क्योंकि  जिस जगह पर आपकी पूरी टीम खड़ी है और जहां पुलिस पाठशाला चल रहा है। यह बच्चे वहां नियमित आ रहे हैं । इसके लिए सेतु का काम समाजसेवी मानवाधिकार आयोग सदस्य नसीमा  और राजू कर रहे है। इतना ही नहीं है जितने भी लोग पाठशाला से जुड़े हैं । हमें कोई ब्रांडिंग किसी तरह का कोई स्वार्थ नहीं है।  हां एक चीज है वह  मिशन हैं इन बच्चों को समाज के मुख्यधारा में लाना । पहले गोपालगंज में पात्र मिल जाएंगे तो आपसे जरूर हम संवाद करेंगे । कहा कि अब इस स्मार्ट‌क्लास के माध्यम से हम भी आप भी और पूरे देश दुनिया के जो भी लोग जिन्हें शिक्षा में रुचि है वह हमारे बच्चों के साथ जुड़कर क्लास करेंगे। एसबीआई अधिकारियों से आग्रह किया कि  आप लोग भी कभी-कभी इन क्लास से जुड़िए। बच्चों का मार्गदर्शन करिए। 

एसबीआई के डीजीएम प्रफुल्ल कुमार झा, ने  कहा कि  एसबीआई सिर्फ व्यवसाय के क्षेत्र में ही अग्रणी  नहीं है। हमारा सामाजिक दायित्व है वह हम पूरा कर रहे हैं। इसके साथ ही हमें गर्व महसूस हो रहा है कि इस पुलिस पाठशाला को विकसित करने में हमारे संस्था का सहयोग मिल रहा है । कहा कि यहां आकर लगा कि  यहां के बच्चों के अंदर कुछ बेहतर कर गुजरने की क्षमता है। आने वाले दिनों में जिस तरह का माहौल है और जिस तरह का वातावरण बच्चों को मिल रहा हैं । यही से बच्चे आईपीएस अवधेश सरोज दीक्षित, डीएसपी सीमा कुमारी यहां से कोई सब इंस्पेक्टर नागेंद्र प्रसाद और हमारे जैसे बैंक अधिकारी बनकर निकलेंगे।‌ यह हमारी कामना है। कहा कि जबसे उनको जानकारी मिली उसके बाद वह यहां पर जाकर देखें। फिर यह एक छोटा सा बदलाव सामने है। 

मेहनत करने वाले माता-पिता की औलाद ही करते बेहतर पढ़ाई 

डीएसपी सीमा कुमारी ने पुलिस पाठशाला के आईकार्ड  का डिजाइन करके एक परिचय पत्र दी। डीएसपी सीमा कुमारी ने कहा कि कभी भी बड़े परिवार के बच्चे ज्यादा बेहतर नहीं करते। वही बच्चे ज्यादा बेहतर करते हैं जिनके माता-पिता गरीबी देखी है। अपनी कहानी कहते हुए कहा कि वह एक बहुत ही साधारण परिवार की बेटी हैं ।उसके पिताजी दूध बेचते। पढ़ाई कि मेहनत से आज उसके शरीर पर पुलिस की वर्दी है।  इसलिए आप लोग पढ़िए और पुलिस पदाधिकारी बनने का सपना देखिए।  वह यहां रहे या ना रहे बिहार में वह कहीं भी रहेंगे जिस दिन वह जानकारी मिलेगी कि यहां के बच्चे पुलिस पदाधिकारी बना । उस दिन ही मेरा सपना सच होगा । कहा कि किसी के सफर का हमसफर बनिए दो कदम साथ चले यही यादगार रह जाता है।  पुलिस की आंख --कान यह हमारे बच्चे हैं। दावा किया कि जितने पुलिस के नजदीक इस चतुर्भुजस्थान इलाके के बच्चे पुलिस पाठशाला के माध्यम से नजदीक है। उतना कोई भी बच्चा समाज का पुलिस के इतने नजदीक नहीं है। जब यह पुलिस अंकल कहते हैं तो हमारा भी सीना चौड़ा होता है। ‌ आप अपनी उम्र से पढ़ाई से एक ऐसा हस्ताक्षर बना लो ताकि आपकी जिंदगी की दिशा और दिशा दोनों बदल सके।  इसके साथ ही उन्होंने वैसे असामाजिक तत्वों को हिदायत दी कि अगर आप किसी की किस्मत सवार नहीं सकते आप इन बच्चों के लिए बेहतर नहीं कर सकते तो फिर उसे बिगाड़ने की कोशिश मत करिएगा। यहां वाले बच्चे हमारे और समाज के बच्चे हैं और इन बच्चों को मुख्यधारा में शामिल करना हम सबका दायित्व है।

 

डीएसपी सीमा ने कहा कि आप किस गली से आते हैं किस मोहल्ले से आते हैं वह कोई माने मतलब नहीं लगता अपने अंदर हुनर पैदा किजीए। अपने को इतना मजबूत करिए ताकि उसे गली और मोहल्ले का पहचान आपसे हो। जैसे आपकी बेटी नसीम से इस इलाके की पहचान अब मजबूत हो रही है। अपने अनुभव को शेयर करते हुए कहा कि यहां आने से पहले वह नसीम को नहीं जानती थी लेकिन आज इस आयोजन में जानने समझने का मौका मिला।

  रेड लाइट एरिया मुजफ्फरपुर चतुर्भुज स्थान में रहने वाले उन बच्चों को जो पुलिस पाठशाला से जुड़कर अपनी पढ़ाई कर रहे हैं ।‌ 

परचम की सचिव मानव अधिकार आयोग के सदस्य और पुलिस पाठशाला कि समन्वय नसीमु खातून को  सम्मानित किया गया। अपने घर पर एक समारोह पूर्वक आयोजन में सम्मानित होने पर नसीमा भावुक हो गई। अपने संबोधन में कहा कि समाज तभी सशक्त होगा जब बच्चे हमारे शिक्षित होंगे । कुछ इस संकल्प के साथ भारतीय स्टेट बैंक की टीम गुमनामी की जिंदगी जीने वाले परिवार के बच्चों में एक रोशनी बनकर‌आई हैं।‌ स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया महिला शाखा पटना के सभी पदाधिकारी के साथ स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के सभी बड़ी अधिकारियों व कर्मियों के प्रति आभार जताया।‌कहां की पुलिस पाठशाला जिला व पुलिस प्रशासन के सहयोग से चल रहा है और यहां धीरे-धीरे बच्चों की संख्या बढ़ रही है।


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